Rao Jodha / राव जोधा का इतिहास
आज हम बात करने वाले हैं मारवाड़ के प्रतापी शासक राव जोधा (Rao Jodha) के इतिहास के बारे में जिन्होंने अपने साम्राज्य को युद्ध कौशल द्वारा विस्तारित किया था राव जोधा का जन्म 28 मार्च 1416 ईस्वी में हुआ था राव जोधा अपने पूर्वजों के क़दमों पर चलते हुए हमेशा विदेशी आक्रमणकारियों से लोहा लेते रहे और उसमें उन्हें सफलता भी प्राप्त हुई थी
राव जोधा राठौड़ राजवंश के थे उनके पिता जी का नाम राव रणमल था राव जोधा शासक बनने से पूर्व अपने पिता राव रणमल के साथ मेवाड़ रियासत में रहते थे परंतु जब मेवाड़ मे 1438 में उनके पिता की हत्या कर दी गई तो वे मेवाड़ से अपने साथियों के साथ निकल कर मारवाड़ की तरफ प्रस्थान किया और वर्तमान बीकानेर जिले के काहुनी गांव में जा पहुंचे राव जोधा अपनी शक्ति तथा सेना को संगठित कर रहे थे और अपने राज्य का विस्तार कर रहे थे और दूसरी तरफ मेवाड़ में हनसा बाई के द्वारा महाराणा की नजरों में जो मारवाड़ के प्रति सोच थी उसमें कुछ परिवर्तन लाने में उनको सफलता मिली शुभ अवसर आते ही राव जोधा ने अपनी सेना को संगठित कर मंडोर पर आक्रमण कर दिया यह आक्रमण 1453 ईस्वी में किया गया था और उस समय मंडोर पर मेवाड़ रियासत का अधिकार था हनसा बाई द्वारा मेवाड़ रियासत और मारवाड़ रियासत के बीच सुलह करवाई गई और इस संधि को आवल बावल की संधि कहते हैं
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राव जोधा और आवल बावल की संधि :
यह संधि मारवाड़ के शासक राव जोधा तथा मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा के मध्य 1453 में हुई थी इस संधि के अंतर्गत जिस क्षेत्र तक बावल यानी कांटेदार झाड़ियां है वहां तक मारवाड़ की सीमा रहेगी और जहां पर आवल यानी कि आंवले के पेड़ दिखाई देने लगेंगे वहां से मेवाड़ की सीमा शुरू हो जाएगी और इस संधि के तहत दोनों ही रियासतों में परिवारिक संबंध भी बढ़े राव जोधा ने अपनी पुत्री श्रृंगार दे का विवाह मेवाड़ रियासत के महाराणा कुंभा से किया और इस संदेश द्वारा दोनों ही रियासतें को फायदा पहुंचा और अपने अपने क्षेत्र में तथा रियासत सीमा के साथ लगने वाले पड़ोसी आक्रमणकारियों के विरुद्ध लोहा लिया जिसमें उन्हें सफलता भी प्राप्त हुई थी
( महाराणा कुंभा ने कुंभलगढ़ दुर्ग का निर्माण 1448 करवाया था जिससे वे गोडवाड़ क्षेत्र पर नजर रख सके क्योंकि उस क्षेत्र से मारवाड़ की सीमा प्रारंभ होती थी ऐसी ऐसी मान्यता है कि जब महाराणा कुंभा इस दुर्ग में अपने महल में निवास करते थे तो वह महल की खिड़कियों से गोडवाड़ क्षेत्र को लगने वाले मारवाड़ की सीमा को देख सकते थे )
राव जोधा द्वारा दुर्ग का निर्माण :
राव जोधा ने मारवाड़ के क्षेत्र का सर्वाधिक विस्तार किया इसी कारण डॉक्टर हरिश्चंद्र गौरीशंकर ओझा ने राव जोधा को मारवाड़ का महान तथा प्रतापी शासक बताया है अपनी रियासत का विस्तार करने के फलस्वरूप राव जोधा ने अपने राज्य को संगठित तथा मजबूत स्थिति प्रदान करने के लिए अपनी रियासत को अपने भाइयों तथा पुत्रों को बांट दिया तथा राव जोधा द्वारा एक नया नगर बसाया गया जिसका नाम जोधपुर रखा गया और जोधपुर के क्षेत्र की ऊंची पहाड़ी पर राव जोधा ने 1459 में एक दुर्ग का निर्माण करवाया जिसको मेहरानगढ़ दुर्ग कहा जाता है इस दुर्ग का निर्माण पहाड़ी पर किया गया और इस पहाड़ी का नाम चिड़िया टूक पहाड़ी है
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| मेहरानगढ़ दुर्ग जोधपुर |
राव जोधा ने अपने भाई कांधल सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए वर्तमान हिसार (हरियाणा) की तरफ अपनी सेना लेकर रवाना हुए थे क्योंकि जब दिल्ली के शासक बहलोल लोदी के सेनापति सारंग खान ने छल कपट द्वारा कांधल सिंह की हत्या कर दी थी तो इसी का वैर लेने के लिए राव जोधा अपनी सेना सहित हिसार पर आक्रमण करते हैं और इस युद्ध में राव जोधा की विजय होती है , अपने भाई कांधल सिंह की हत्या का बदला सारंग खान को युद्ध मैदान में मार कर लेते हैं इसके उपरांत राव जोधा वापिस अपनी रियासत की तरफ बढ़ते हैं तो वे अपने पुत्र बीका से एकवचन मांगते हैं और इस वचन में वे कहते हैं कि बीका कभी भी है आप अपने भाइयों के साथ युद्ध नहीं करेंगे तथा कभी भी आप जोधपुर पर अधिकार करने का नहीं सोचेंगे अपने पिता के इस वचन को बिका निभाते हैं और जोधपुर रियासत से अपनेे साथियोंं के निकाल कर पश्चिम की तरफ कुछ करतेे हैं और वहां पर अपनेेेे नाम से एक शहर की स्थापना करते हैं जिसको वर्तमान में बीकानेर कहते हैं
राव जोधा अंतिम समय :
करीब 50 वर्ष तक मारवाड़ रियासत पर शासन करते हैं तथा इसके बाद राव जोधा की मृत्यु 1489 में हो जाती है और अपनी मृत्यु से पूर्व राव जोधा अपने उत्तराधिकारी के रूप में महारानी जसमा दे हाड़ी के पुत्र सातल देव को जोधपुर रियासत का भावी महाराजा घोषित कर दिया था राव सातल देव भी अपने पिता की तरह वीर और प्रतापी भी शामिल थे उन्होंने अजमेर के मल्लू खान के साथ युद्ध किया था जिसमें वे विजई हुए थे लेकिन जब वे अपने दुर्ग में पहुंचे तो शारीरिक लहू ज्यादा बह जाने के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी राव सातल देव ने 2 से 3 वर्ष तक की शासन किया था इसके बाद उनके भाई राव सुजा मारवाड़ के शासक बने थे
( राव जोधा के वंशज आज भी जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस मे निवास करते हैं )
राव जोधा द्वारा बसाया गया शहर वर्तमान मे एक जिला है जिसको सूर्य नगरी भी कहते हैं जो राजस्थान राज्य के अंतर्गत आता है वर्तमान में ऐतिहासिक इमारतें और प्राचीन स्थान मौजूद हैं जो अपने प्राचीन विरासत को संजोए रखा है और सरकार द्वारा भी इन विरासतो तथा इमारतों को सुरक्षित रखने के लिए प्रयास भी किए जाते हैं
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