Maharaja Suheldev | महाराजा सुहेलदेव

Maharaja  Suheldev | महाराजा सुहेलदेव

इतिहास के  ऐसे राजा  के बारे में हम बात करेंगे जिन के शासनकाल मे श्रावस्ती के लोग अपने घरों के दरवाजों पर  ताले नहीं लगाते थे , जिन्होंने भारतीय संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था बात है 11वीं शताब्दी की जब श्रावस्ती के राजा प्रसनजीत के घर 16 फरवरी बसंत पंचमी के दिन एक बालक का जन्म हुआ जिसका नाम सुहेलदेव रखा गया था श्रावस्ती उस समय एक छोटा सा राज्य था लेकिन जब सुहेलदेव श्रावस्ती के सिंहासन पर बैठे तो उन्होंने सर्वप्रथम अपनी रणनीतिक युद्ध कौशलों द्वारा अपने साम्राज्य का भौगोलिक रूप से विस्तार किया और एक बहुत बड़े भाग पर अधिकार कर लिया जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बहराइच  जिले तथा उसके आसपास का क्षेत्र सम्मिलित है

महाराजा सुहेलदेव के बारे में विस्तार से जानने से पहले हम आपको बता दें कि महाराजा सुहेलदेव का जिक्र 11वीं शताब्दी में समकालीन इतिहासकार या अन्य शासक रहे उन्होंने महाराजा सुहेलदेव का जिक्र नहीं किया है बल्कि महाराजा सुहेलदेव का जिक्र 14वी शताब्दी के इतिहासकार अमीर खुसरो के ग्रंथ एजाज ए खुशरवी में मिलता है इस ग्रंथ में अमीर खुसरो बहराइच के युद्ध का वर्णन करता है जिसमें सालार मसूद गाजी तथा सुहेलदेव के बीच हुए युद्ध का वर्णन करता है और इसके बाद महाराजा सुहेलदेव का इतिहास में उल्लेख 17 वी शताब्दी में मिलता है जब लेखक व इतिहासकार मसूदी ने अपनी पुस्तक मिराज ए मसूदी में बहराइच युद्ध तथा सुहेलदेव और सालार मसूद गाजी का वर्णन किया है

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अक्सर भारत पर विदेशी आक्रमणकारियों की नजरें  बनी रहती थी क्योंकि उस समय अखंड भारत एक समृद्ध प्रदेश था जहां पर विभिन्न राजाओ ने मंदिरों , महलों तथा ऐसी भव्य इमारतों और सरोवर का निर्माण कराया और राजाओं द्वारा मंदिरों में भारी मात्रा में संपत्ति और धन का दान दिया जाता था जिससे विदेशी आक्रमणकारी अखंड भारत की तरफ आकर्षित हुए थे

बहराइच का युद्ध 

11वीं शताब्दी में गजनी के शासक महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया तो उसके साथ उसका भतीजा सालार मसूद गाजी भी था|सालार मसूद गाजी अपने साथ लाखों की सेना लेकर अखंड भारत के बहुत बड़े भाग पर अधिकार करता हुआ तथा मंदिरों को लूटता हुआ जब बहराइच पहुंचा तो उसके सामने बहराइच के शासक महाराजा सुहेलदेव अपनी विशाल सेना लेकर खड़े थे जब प्रथम युद्ध में सोहेल देव और सालार मसूद गाजी के बीच झड़प हुई तो इसमें सालार मसूद विजय रहा लेकिन फिर भी सुहेलदेव ने हार नहीं मानी और अपनी सेना को फिर से संगठित किया और युद्ध करने का निश्चय किया बहराइच के इस युद्ध में सन 1034 मे महाराजा सुहेलदेव अपने राज्य तथा आसपास के राजाओं को पहले खत लिख कर संगठित होने के लिए आश्वासन दिया था और इस युद्ध में महाराजा सुहेलदेव की विजय होती है महाराजा सुहेलदेव भाला चलाने में बहुत ही निपुण थे इसलिए उन्होंने अपने भाले से सालार मसूद गाजी पर वार किया जिसमें सालार मसूद जमीन पर गिर गया और उसको महाराजा सुहेलदेव ने युद्ध भूमि में मार गिराया  और यह बात चारों तरफ फैल जाती है फिर इसके बाद करीब 200 से 300 वर्षों तक कोई भी विदेशी आक्रमणकारी ने साहस नहीं किया अखंड भारत पर आक्रमण करने का |

Maharaja  Suheldev / महाराजा सुहेलदेव
महाराजा सुहेलदेव

महाराजा सुहेलदेव को लेकर कुछ महत्वपूर्ण तथ्य 

(1) ब्रिटिश कालीन गैजेटियर के अनुसार महाराजा सुहेलदेव को बेंस राजपूत और नागवंशी क्षत्रिय बताया है और उस घटना का भी जिक्र किया है जो बहराइच में घटी थी


(2) जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह 2015 में लखनऊ के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे तो उन्होंने महाराजगंज के पीजी कॉलेज के एक प्रोफेसर डॉक्टर परशुराम गुप्ता की लिखी किताब को उद्घाटन किया था डॉ परशुराम गुप्ता ने यह किताब महाराजा सुहेलदेव पर लिखी थी और यह कार्यक्रम भी महाराजा सुहेलदेव की सालार मसूद गाजी पर विजय की स्मृति में आयोजित किया गया था डॉ गुप्ता ने अपनी किताब में 21 राजाओं के नामों का भी उल्लेख किया है जिनको महाराजा सुहेलदेव ने संगठित होने के लिए पत्र लिखा था

( महाराजा सुहेलदेव बेंस राजपूत थे जो सूर्यवंश मे आते हैं )

डॉ परशुराम गुप्ता अपनी किताब में महाराजा सुहेलदेव को नागवंशी क्षत्रिय और राजपूत बताते हैं और आगे वर्णन करते हैं कि उन्होंने अपनी तलवार से सालार मसूद की जिहादी फौज को आगे बढ़ने से रोका था और विदेशी आक्रमणों में सुहेलदेव का खौफ करीब 200 से 300 वर्ष तक रहा जिससे कोई भी आक्रमणकारी की हिम्मत  नहीं हुई आक्रमण करने की अखंड भारत पर 

(3) इतिहासकारों ने 7 वी शताब्दी से लेकर 12 वीं शताब्दी तक राजपूत काल का उल्लेख किया है इससे भी यह पुख्ता प्रमाण मिलते हैं कि महाराजा सुहेलदेव क्षत्रिय वंश से आते है क्योंकि उपरोक्त तथ्यों  में जानकारी मिलती है कि उनका शासन काली 11वीं शताब्दी में था

( इन भी तथ्यों से तो हमें प्रमाण मिलता है कि महाराजा सुहेलदेव क्षत्रिय वर्ण से थे और वह अन्य राजपूत राजाओं की तरह विदेशी आक्रमणकारियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे )

कौन थे महाराजा सुहेलदेव 

वर्तमान की राजनीति हलचल में महाराजा सुहेलदेव को लेकर कई सारे अलग-अलग तथ्य विभिन्न समय अंतराल में दिए जाते हैं अब हम बात करने वाले हैं महाराजा सुहेलदेव को लेकर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने उनकी जाति का निर्धारण कर दिया है विभिन्न राजनैतिक पार्टियां अपने राजनीतिक फायदे के लिए महापुरुषों के इतिहास तथा उनके गौरव को महत्व तो देती है परंतु जाति का भी उल्लेख  कर देती है क्योंकि इससे उनको वोट प्राप्त हो सके और वह सत्ता में आ सकें परंतु जब हमने पड़ताल शुरू की तो हमें पता चला की इतिहास में महाराजा सुहेलदेव को लेकर बहुत कम वर्णन हुआ है सर्वप्रथम वर्णन 14 शताब्दी के इतिहासकार अमीर खुसरो अपने ग्रंथ में करते हैं और इसके बाद 17 वीं शताब्दी के इतिहासकार मसूदी महाराजा सुहेलदेव का वर्णन अपनी किताब में करते हैं

( सुहेलदेव एक्सप्रेस ट्रेन का उद्घाटन 2016 में रेल मंत्री मनोज सिन्हा ने दिल्ली से गाजीपुर तक हफ्ते में 3 दिन चलाने का निर्णय किया था लेकिन त्योहारों को मद्देनजर रखते हुए इसको अब हफ्ते में में चार दिन चलाने का निर्णय किया गया है )

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में एक राजनैतिक पार्टी सुहेलदेव के नाम से है उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में महाराजा सुहेलदेव की मूर्ति का अनावरण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया था और उस समय वहां पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे अपने भाषण में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक महान शासक तथा वीर योद्धा बताया था और एक डाक टिकट जारी किया था जिससे लोग महाराजा सुहेलदेव के बारे में जान सकेंगे और उनसे जुड़ सकेंगे

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