अजेय पुरूष महाराणा प्रताप

अकबर की भारत में हुंकार उठी।
तो राणा की यह ललकार उठी।
 
राणा ने युद्ध को कमर कसी।
चारों तरफ हा! हा! कार मची।

राणा की असि मानसिंह के गज 
पर जा धसी।
मान सिंह हुआ युद्ध से भाग खड़ा।

चेतक को लगा जख्म बड़ा।
राणा मुगलों को मारने पे था अड़ा।

रक्त रंजित हो गई यह धरा।
अजेय, विजय, स्वाभिमानी हैं राणा 
तू बड़ा।

अकबर का अभिमान रह गया इस
इस वीर प्रसुता भुमि पर पड़ा।

ऐ! मेवाड़ के राणा तूने किया यह
काम  बड़ा।
जो दिल्ली का बादशाह भी तेरे चरणों
में आ पड़ा।

आज स्मरण हो आया उस चितौड़ युद्ध
का जब जयमल कल्ला धड़ पर था लड़ा। 

आज तेरी शौर्यगाथा लिखकर हुआ 
यह सिर खड़ा।
पुकार रही यह भारतभूमि अजेय 
पुरूष स्वाभिमानी राणा तू बड़ा।



 
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