सनातन सर्वोपरी
सुविख्यात यह धर्म हमारा
जिसने विश्व को दिया सहारा।
आदिकाल से यह पराकाष्ठित
इसकी सभ्यता राष्ट्र गौरव है।
अनंत अपार पवित्र यह व्याप्त
इस संसार में आदिकाल से
सनातन ज्ञान का स्त्रोत रहा।
किंतु आज यह हिंदूत्व टूट रहा
जात-पात की जंग छीड़ी है
यह देख द्रोही देश को लूट रहा।
कब तक यह असंतुलित व्यवहार
रहेगा कब तक देश यह सहेगा।
जब तक एक ब्राह्मण क्षुद्र को भाई
नही कहेगा।
जातिवाद का जहर पिलाकर
मत के भोगी हर्षित हो रहे।
लेकिन भला इनको इसकी
क्या पड़ी जहर पीकर भी सो रहे।
आज कुछ बुद्धिहीन आलोचक
बोल रहे सनातन धर्म को संकिर्ण
सोच में तोल रहे।
भगवा से भयभीत ये लोग आंतक
के मनोरोगी है।
यह राष्ट्रद्रोह छल कपट विश्वासघात
के योगी है।
आंतकवाद के यह गुप्तचर देश मे बैठे
पहन अलग भेष।
अस्त्र शस्त्र सब अदृश्य हैं धार्मिक हिंसा
शक्ति बस एक।
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