Prime Minister and council minister / प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद

संविधान : संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 52 से 78 तक संघीय कार्यपालिका का वर्णन है जिसमें राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , मंत्री परिषद और महान्यायवादी होते हैं

मूल संविधान : मूल संविधान में मंत्रिमंडल शब्द का उल्लेख नहीं था

जैसा कि हमने राष्ट्रपति के बारे में पढ़ा था कि राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक अध्यक्ष होता है परंतु उसकी वास्तविक शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री और उसकी मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाता है अर्थात प्रधानमंत्री वास्तविक अध्यक्ष होता है जो राष्ट्रपति की शक्तियों  को प्रयोग में लाता है

अनुच्छेद 74 : यह अनुच्छेद इस बात का स्पष्ट रूप से वर्णन करता है कि भारत के राष्ट्रपति को सलाह व उसके कार्यों में सहायता देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी और इस मंत्री परिषद का मुख्य प्रधानमंत्री होगा यही मंत्रिपरिषद प्रधानमंत्री को भी कार्यों में सलाह प्रदान करती हैं और प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के नाम पर सभी कार्य पूरे करता है क्योंकि राष्ट्रपति संवैधानिक अध्यक्ष है लेकिन वास्तविक अध्यक्ष प्रधानमंत्री है तो देश के सभी कार्य राष्ट्रपति के नाम पर प्रधानमंत्री द्वारा किए जाते हैं

अनुच्छेद 75 के तहत राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता  को प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त करता है और प्रधानमंत्री अन्य मंत्रिपरिषद के सदस्यों की सिफारिश करता है तथा राष्ट्रपति उनको नियुक्त करता है
फिर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति को छह महीनों के भीतर अपना बहुमत सिद्ध करना होता है अगर वह बहुमत सिद्ध कर लेता है तो वह कार्यकाल 5 वर्ष तक करता है और अगर बहुमत सिद्ध नहीं कर पाता है तो उसे प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना होता है अर्थात इस बात से साबित होता है कि राष्ट्रपति सभा के किसी भी सदस्य को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है और प्रधानमंत्री 6 माह तक वह बिना किसी बहुमत के कार्य भी कर सकता है
मंत्री परिषद के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है प्रधानमंत्री के सलाह पर और इन मंत्रियों की संख्या निश्चित नहीं होती थी क्योंकि जनता द्वारा लोकसभा में अगर एक ही दल को स्पष्ट बहुमत मिलता था तो एक नेता जो प्रधानमंत्री बनता है तो अन्य सदस्य उस दल के किसी न किसी रूप में भागीदार थे चुनाव जिताने में तो प्रधानमंत्री बहुत सारे नाम राष्ट्रपति को सलाह देता था कि आप इन सभी को मंत्री परिषद के सदस्य नियुक्त करें अब समस्या यहां पर यह खड़ी होगी प्रधानमंत्री एक लेकिन मंत्री परिषद में इतने सारे सदस्य हो जाते थे जिससे परामर्श लेना कठिन हो जाता था फिर समय के अनुसार श्री अटल बिहारी वाजपई द्वारा 2003 में 93 संविधान संशोधन किया गया इस संशोधन के अनुसार अब लोकसभा के सदस्यों  की संख्या  का 15 प्रतिशत सदस्यों को ही मंत्री परिषद में जगह मिल सकती है यह संविधान संशोधन बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हुआ क्योंकि इससे सरकार को कार्य करने में आसानी होती है और सरकार और उसके दल के सदस्यों में आपसी भावना भी बनी रहती है

"मंत्री परिषद का उत्तरदायित्व यह बनता है कि वह संसद के प्रति अर्थात संसद के सदन लोकसभा के प्रति पूर्ण रूप से उत्तरदायित्व बनी रहे"

"मंत्री परिषद में कैबिनेट मंत्री , राज्यमंत्री और उप मंत्री होते हैं"

उप प्रधानमंत्री : संविधान में उप प्रधानमंत्री शब्द या पद का उल्लेख नहीं है लेकिन जब जब लोकसभा में एक ही दल को स्पष्ट बहुमत मिलता है और उस दल में दो या दो से ज्यादा व्यक्तियों का प्रभु तव ज्यादा हो अर्थात उस दल में उन व्यक्तियों की छवि ज्यादा लोकप्रिय हो तो इस स्थिति में किसी भी व्यक्ति को निराश नहीं कर सकती सरकार तो इस स्थिति में एक व्यक्ति को नेता अर्थात प्रधानमंत्री और दूसरे व्यक्ति को उप प्रधानमंत्री पद का दायित्व सौंपा जाता है उप प्रधानमंत्री पद का महत्व कैबिनेट मंत्री के सम्मान होता है

महत्वपूर्ण बातें : (1) भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू बने
(2) भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बनी
(3) प्रथम कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा बने
(4) अटल बिहारी वाजपेयी ऐसे प्रधानमंत्री बने जिनका कार्यकाल मात्र 13 दिन का रहा अर्थात सबसे कम दिन तक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी रहे
(5) भारत के प्रधानमंत्री  नरेंद्र दामोदरदास मोदी 21वे प्रधानमंत्री बने
(6) अगर प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए त्यागपत्र दे दिया या किसी कारणवश पद पर रहते हुए मृत्यु हो जाए तो समस्त मंत्री परिषद को इस्तीफा देना पड़ता है और सरकार का नए सिरे से गठन होता है

महत्वपूर्ण प्रशन :-
(1) भारत के प्रथम कार्यवाहक प्रधानमंत्री कौन बने?
(2) भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री कौन बनी?
(3) भारत के प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद की नियुक्ति कौन करता है
(4) प्रधानमंत्री अपना इस्तीफा या त्यागपत्र किसे देता है?
(5) 91वा संविधान संशोधन 2003 किस प्रधानमंत्री के काल में हुआ?



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