Fundamental Right / मौलिक अधिकार

Fundamental Right / मौलिक अधिकार


परिभाषा : वे अधिकार जो व्यक्ति के जीवन को  सुरक्षा प्रदान करते हैं  और व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करते हैं अर्थात वे अधिकार जो व्यक्ति के लिए अनिवार्य है और संविधान द्वारा प्रदान किए गए हैं मौलिक अधिकार कहलाते हैं

तथ्य : (1) संविधान के भाग तीन में अनुच्छेद 12 से 35 के बीच मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है
(2) भारत के संविधान में मौलिक अधिकार अमेरिकी संविधान से लिए गए हैं
(3) 44 वा संविधान संशोधन 1978 के समय भारत के प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई और राष्ट्रपति श्री नीलम संजीव रेड्डी थे

मौलिक अधिकार का इतिहास : 


(1) विश्व में सर्वप्रथम फ्रांस ने नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए बिना किसी संवैधानिक आज्ञा के 

(2) अमेरिका विश्व का प्रथम देश बना जिसने अपने नागरिकों को संवैधानिक आज्ञा से मौलिक अधिकार प्रदान किए

" मौलिक अधिकारों के भाग को मैग्नाकार्टा कहा जाता है "

" संविधान में प्राप्त मौलिक अधिकार व्यक्ति की व्यक्ति से तथा व्यक्ति को राज्य के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है  कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के मौलिक अधिकार का हनन नहीं कर सकता "

" मौलिक अधिकारों की सर्वप्रथम मांग 1895 में तिलक द्वारा संविधान सभा के रूप में की गई थी"

मूल संविधान : वह सविधान जो 26 जनवरी 1950 को बनकर तैयार हुआ था अर्थात लागू हुआ उसके अनुसार भारतीय नागरिकों को 7 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए थे जो निम्नलिखित है :-
(1) समानता का अधिकार
(2) स्वतंत्रता का अधिकार
(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार
(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
(5) संस्कृति और शिक्षा का अधिकार
(6) संपत्ति का अधिकार
(7) संवैधानिक उपचारों का अधिकार

44 वा सविधान संशोधन 1978 :


(1) इस संशोधन के अनुसार राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 में प्राप्त मौलिक अधिकार निलंबित नहीं होंगे
(2) इस संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों  की सूची  से हटाकर अनुच्छेद 300 (क) के तहत कानूनी अधिकार बना दिया

अनुच्छेद 12 : इस अनुच्छेद में राज्य शब्द की परिभाषा का वर्णन है अर्थात एक राज्य का निर्माण भारत सरकार , संसद , राज्य सरकार , विधानमंडल , स्थानीय अधिकारी तथा अन्य अधिकारी आदि से राज्य का निर्माण होता है
अनुच्छेद 13 : इस अनुच्छेद में न्यायिक पुनरावलोकन की बात कही गई है इसमें वे विधि या कानून जो स्वतंत्रता से पूर्व लागू थे और उन कानूनों से मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो वह कानून शून्य हो जाएगा अर्थात समाप्त नहीं होगा इन कानूनों को शून्य करने की शक्ति उच्चतम न्यायालय को अनुच्छेद 32 के तहत तथा उच्च न्यायालय को शक्ति अनुच्छेद 226 के तहत प्राप्त है

🌟 वर्तमान में नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार प्राप्त है जो निम्नलिखित है :-

(1) समानता का अधिकार : ( अनु.14 से 18 )


अनु. 14 :  विधि के समक्ष समता अर्थात कानून की नजरों में सभी समान है
अनु. 15 : धर्म मूल वंश जाति लिंग और जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का प्रतिषेध अर्थात राज्य अपने नागरिकों से धर्म मूल वंश जाति लिंग और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा
अनु. 16 : लोक नियोजन के अवसरों में समानता अर्थात राज्य सभी नागरिकों को रोजगार के अवसरों में सम्मान अवसर प्रदान करेगा किसी को भी जन्म धर्म मूल वंश के आधार पर अयोग्य नहीं कर सकता है
अनु.17 : अस्पृश्यता का अंत अर्थात राज्य या नागरिक किसी भी व्यक्ति से छुआछूत नहीं कर सकता इसका उल्लंघन होने पर उस व्यक्ति को दंडित किया जा सकता है जिसमें अनुच्छेद 17 का उल्लंघन  किया हो
अनु. 18 : उपाधियों का अंत अर्थात राज्य द्वारा दी गई उपाधियां जैसे शिक्षा के क्षेत्र में, सेना के क्षेत्र में, राजनैतिक क्षेत्र में आदि ही मान्य होगी

(2) स्वतंत्रता का अधिकार : ( अनु.19 से 22 )



अनु. 19 : अनुच्छेद नागरिकों को 6 स्वतंत्रता प्रदान करता है अर्थात संगठन बनाने की , घूमने फिरने की , निवास करने की , जीवन जीने की ,बोलने की स्वतंत्रता प्रदान करता है
अनु. 20 : अपराधी को दोष सिद्धि के संबंध में सरक्षण अर्थात अपराधी को अपने प्रति साक्ष्य देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और उससे एक दंड के लिए एक से अधिक बार दंडित नहीं किया जा सकता
अनु. 21 : प्राण व दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण अर्थात किसी भी व्यक्ति या नागरिक को जीवन जीने या उसकी दैनिक दिनचर्या से वंचित नहीं किया जा सकता
अनु. 22 : गिरफ्तारी से संरक्षण अर्थात अपराधी को 24 घंटे के भीतर न्यायालय में पेश करना जरूरी है और अपराधी को गिरफ्तार करने के कारण बताना जरूरी है और अपराधी खुद का बचाव करने के लिए वकील रख सकता है

(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार : ( 8अनु. 23 से 24)



अनु. 23 : मानव के व्यापार और बाल श्रम पर प्रतिषेध अर्थात मानव को व्यापार के रूप में क्रय-विक्रय और बिना किसी मजदूरी (बेगार )कार्य कराने पर  प्रतिषेध
अनु. 24 : कारखानों फैक्ट्रियों आदि में कम उम्र के बाल को के कार्य करने पर प्रतिषेध अर्थात किसी भी 6 से 14 वर्ष के बाल को द्वारा फैक्ट्री में कार्य करने पर प्रतिषेध है इसका पालन न करने पर फैक्ट्री मालिक या कंपनी या फर्म पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है

(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार : (अनु. 25 से 28)



अनु. 25 : धार्मिक कार्यों के प्रचार  की स्वतंत्रता अर्थात कोई भी व्यक्ति या नागरिक अपने धर्म के भगवान की आस्था , विश्वास या प्रचार कर सकता है बिना किसी भय के
अनु. 26 : धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता अर्थात अपने धार्मिक कार्य आयोजन करने की स्वतंत्रता होगी
अनु. 27 : धार्मिक कार्यों के लिए कर की संदाय की स्वतंत्रता अर्थात राज्य किसी भी धर्म को ज्यादा महत्व नहीं देगा उसकी नजरों में सभी धर्म सम्मान होंगे राज्य अपने कर को किसी भी धर्म के प्रचार या प्रसार के लिए खर्च नहीं करेगा
अनु. 28 : धार्मिक शिक्षा की उपासना में उपस्थित होने की स्वतंत्रता अर्थात किसी भी व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने की स्वतंत्रता होगी

(5) संस्कृति और शिक्षा का अधिकार:(अनु.29से30)



अनु. 29 : अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण अर्थ अर्थ देश के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों को अपनी संस्कृति भाषा आदि को सुरक्षित रखने का अधिकार है
अनु. 30 : अल्पसंख्यक वर्ग को अपने शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करने का अधिकार अर्थात अल्पसंख्यक वर्ग को अपनी रूचि के अनुसार शिक्षा संस्था की स्थापना करने और उसमें शिक्षा देने अथवा ग्रहण करने की स्वतंत्रता होगी

(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार :(अनु.32)



संवैधानिक उपचारों का अधिकार मौलिक अधिकारों को सुरक्षा प्रदान करता है अर्थात मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर या हनन होने पर सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न प्रकार की रिट जारी की जाती है इन रिट  के माध्यम से न्यायालय को यह पूछने का अधिकार है कि किस अधिकार से आपने पद ग्रहण किया है या किस अधिकार के माध्यम से आपने पद का त्याग किया है

नोट : 26 जनवरी 1950 के संविधान के अनुसार अनुच्छेद 31 में संपत्ति का अधिकार नामक मौलिक अधिकार था जो कि 44 वा संविधान संशोधन 1978 द्वारा 300 (क) कानूनी अधिकार हो गया है


प्रमुख रिट : (1) बंदी प्रत्यक्षीकरण
(2) परमादेश
(3) प्रतिषेध
(4) उत्प्रेषण
(5) अधिकार पृच्छा


🌟 केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकार निम्न अनुच्छेद मे वर्णित है :-
(1)अनुच्छेद 15 के अंतर्गत मूल वंश जाति लिंग धर्म और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक
(2) अनुच्छेद 16 के अंतर्गत लोक नियोजन या रोजगार के अवसर में सभी को समान अवसर मिले
(3) अनुच्छेद 19 के अंतर्गत राज्य के किसी भी भाग में घूमने फिरने , बोलने , निवास ,जीवन जीने आदि की स्वतंत्रता
(4) अनुच्छेद 29 के अंतर्गत अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण प्रदान करना
(5) अनुच्छेद 30 के अंतर्गत अल्पसंख्यक वर्गों को अपने शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करने का अधिकार प्रदान करना


मौलिक अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न निम्नलिखित है :-



(1) मौलिक अधिकारों की रक्षा किस अनुच्छेद में की गई है?
(2) भारत ने मौलिक अधिकार किस देश से लिए हैं?
(3) वर्तमान में मौलिक अधिकार कितने हैं?
(4) 44 वां संविधान संशोधन 1978 के तहत कौन से अनुच्छेद पर राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान रोक नहीं लगा सकते?
(5) कौन से संविधान संशोधन के द्वारा संपत्ति के अधिकार को एक कानूनी अधिकार बना दिया?
(6) मौलिक अधिकारों में संशोधन कौन कर सकता है?
(7) वह कौन सा देश है जिसने सबसे पहले अपने नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए बिना किसी संवैधानिक आज्ञा के?
(8) मौलिक अधिकारों का निलंबन कौन कर सकता है?
(9) किस अनुच्छेद के अंतर्गत मानव व्यापार पर रोक लगाई गई हैं?
(10) उपाधियों का अंत किस मौलिक अधिकार के अंतर्गत आता है?


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