भारतीय संविधान में भाग 6 के अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य कार्यपालिका के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है राज्य की कार्यपालिका में राज्यपाल, मंत्री परिषद, मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता शामिल हैं।
जैसे भारत का राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख होता है, वैसे ही प्रत्येक राज्यों के राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं अर्थात वे राज्य के प्रथम नागरिक होते हैं राज्य के सभी कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाते हैं।
राज्यपाल का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं होता है अर्थात राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है
राज्यपाल राष्ट्रपति के आदेश के अनुसार पद ग्रहण करता है और राष्ट्रपति राज्यपाल को अन्य राज्यों का कार्यवाहक राज्यपाल भी नियुक्त कर सकता है ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किसी राज्य का राज्यपाल पद पर रहते हुए मृत्यु हो जाए।
कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में वह दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है ऐसी स्थिति में उसके वेतन भक्तों का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा राज्यों के अनुपात के रूप में राज्यपाल को प्रदान किया जाता है।
राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के रूप में कार्य करता है और राज्य की कार्यपालिका शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है इसलिए इसलिए राज्यपाल केंद्र और राज्य में दोहरी भूमिका निभाता है
" 7 वें संविधान संशोधन 1956 में पंडित जवाहरलाल नेहरु की सरकार ने एक महत्वपूर्ण सविधान संशोधन किया इस संशोधन के तहत एक राज्यपाल को एक से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। "
🌟 संविधान के अनुच्छेद 153 में यह बात का वर्णन है कि भारत के प्रत्येक राज्यों का एक राज्यपाल होगा जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा
राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसाद मंतांत पद धारण करता है राष्ट्रपति जब चाहे तब राज्यपाल को अपने पद से हटा सकता है
🌟 भारत के संविधान में वर्णित है कि अनुच्छेद 154 के अनुसार राज्य का राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है अर्थात राज्य की कार्यपालिका शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका शक्तियों का संवैधानिक प्रमुख होता है लेकिन इन शक्तियों का प्रयोग राज्य का होता है मुख्यमंत्री करता है इसलिए राज्य का वास्तविक मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री होता है
🌟 अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करता है अर्थात राज्यपाल राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है
🌟 अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल के कार्यकाल पद ग्रहण से लेकर आगामी 5 वर्ष तक होता है लेकिन राष्ट्रपति के पद परant रहने के कारण राष्ट्रपति थाको कार्यकाल से पहले भी हटा दिया जा सकता है
☀ अनुच्छेद 157 के अनुसार भारत के किसी भी राज्य में राज्यपाल मनोनीत होने की योग्यता के बारे में बताया गया है सर्वप्रथम वह व्यक्ति राज्यपाल मनोनीत हो सकता है जिसके पास संविधान में विवरण निम्नलिखित योग्यता होनी चाहिए
(1) राज्यपाल मनोनीत होने के लिए वह भारत का नागरिक होना चाहिए
(2) राज्यपाल मनोनीत होने के लिए व्यक्ति की आयु 35 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए
🌟 अनुच्छेद 158 में इस बात का उल्लेख किया गया है कि राज्यपाल मनोनीत होने के लिए व्यक्ति के पास निम्न शर्ते होनी चाहिए जैसे वह पागल ना हो, बच्चों को घोषित ना हो आदि।
☀ अनुच्छेद 159 हमें यह बात बताता है कि राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत व्यक्ति को राज्यपाल पद की शपथ उच्च न्यायालय का न्यायपालिका दिलाता है
☀ भारतीय सविधान में राज्यपाल को सव विवेकी शक्तियां भी प्राप्त है और सवुण शक्तियों के खिलाफ भारत के किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती है अर्थात उसके आदेशों के खिलाफ किसी भी न्यायालय में अपील नहीं कर सकते।
☀ राज्य का राज्यपाल राज्य विधानसभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है और शपथ दिलाता है, उसकी मंत्री परिषद के मंत्रियों की भी नियुक्ति करता है और उन्हें शपथ दिलाता है शपथ ग्रहण कार्यक्रम में राज्यपाल खुद या अपने द्वारा नियुक्त किसी भी व्यक्ति से मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद को शपथ धारणता है
☀ राज्यपाल को अपने पद पर रहते हुए उसको वेतन भट्ट कास्ट के अनुसार निर्धारित किया जाता है वे प्रदान किए जाते हैं किको अपने आवास में बिना किसी किराया दिए रह सकते हैं और राज्यपाल पद की अवधि पूर्ण होने के बाद उसको अपने वेतन का 50% पेंशन के रूप में दिया जाता है
☀ राज्यपाल राज्य सरकार के कार्यों का संचालन राज्यपाल के नाम से किया जाता है
☀ राज्यपाल राज्यपाल को वेतन भत्ते राज्य की संचित निधि से दिए जाते हैं
☀ राज्यपाल महाधिवक्ता राज्य लोक सेवा आयोग राज्य वित्त आयोग राज्य निर्वाचन आयोग विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति आदि की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है
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