Chief Minister / मुख्यमंत्री

भारतीय संविधान में भाग 6 के अनुच्छेद 153 से 167 में राज्य की कार्यपालिका का उल्लेख है जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री परिषद और महाधिवक्ता शामिल हैं।

 सविधान में राज्य का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होता है और राज्य का मूल प्रमुख मुख्यमंत्री होता है


राज्यपाल की पहल: राज्य के विधानसभा चुनाव मे विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों का चयन विधानसभा पहुंचते हैं तो उन विधानसभाओं के सदस्यों में बहुमत दल के प्रतिनिधि को राज्यपाल राज्य में सरकार बनाने के लिए प्रस्ताव भेजता है।

राज्यपाल द्वारा प्रेषित प्रस्ताव को बहुमत दल के अधिकारियों द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है और वह सरकार बनाने के लिए निश्चित तारीख को बहुमत सिद्ध करके सरकार बनाने की पेशकश करती है।

 शपथ समारोह: राज्यपाल बहुमत दल के प्रमुख या प्रतिनिधित्व व्यक्ति को राज्य का मुख्यमंत्री नियुक्त करता है और मुख्यमंत्री की सिफारिश पर वह मंत्री परिषद की भी नियुक्ति करता है अर्थात राज्यपाल मुख्यमंत्री और उनकी मंत्री परिषद को स्वयं या उनकी उपस्थिति (प्रोटेम स्पीकर) द्वारा निश्चित तारीख आयोजन शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन द्वारा शपथ दिलाई जाती है

वास्तविक प्रधान: राज्य का मुख्यमंत्री प्रधान होने के नाते वह सभी कार्य राज्यपाल के नाम पर करता है और वह अपने मंत्री परिषद के सदस्यों को भी विभिन्न कार्यों का प्रतिनिधित्व प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री और उनकी मंत्री परिषद: यदि राज्यपाल द्वारा ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाता है जो विधान सभा , विधान परिषद का सदस्य नहीं है तो उस व्यक्ति को 6 महीने के भीतर किसी भी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है यदि वह ऐसा नहीं कर पाता है तो उसको अपने पद से इस्तीफा देना पड़ता है

 मुख्यमंत्री नियुक्त किए गए व्यक्ति को शपथ ग्रहण कार्यक्रम से 1 महीने के भीतर अपना बहुमत विधानसभा में स्पष्ट करना होता है अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है और उसकी सरकार गिर जाती है ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर राज्य में दोबारा चुनाव कराने के लिए आवश्यक हो जाते हैं या किसी दूसरे दल द्वारा बहुमत साबित करने की पेशकश की जाती है तो राज्यपाल उस दल को सरकार बनाने के लिए कह रहे हैं।

प्रसाद पर्यंत पद धारण: राज्य के मुख्यमंत्री का कार्यकाल निश्चित नहीं होता है क्योंकि वह राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाता है तो वह जब तक मुख्यमंत्री बना रह सकता है जब तक उसके पास विधानसभा में बहुमत होगा अर्थात मुख्यमंत्री राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है 

 वेतन भत्ते: मुख्यमंत्री के वेतन भत्ते का निर्धारण विधानसभा द्वारा तय किया जाता है इसमें मुख्यमंत्री को निशुल्क आवास , भते और चिकित्सा सुविधा दी जाती है वह राज्य का मुख्यमंत्री जब तक रहेगा तब तक उसको यह सभी सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जाती है इन सब का निर्धारण राज्य की संचित निधि से व्यय किया जाता है

मुख्यमंत्री और उनके कार्य: मुख्यमंत्री मंत्री परिषद का अध्यक्ष होने के नाते वह मंत्री परिषद की अध्यक्षता करता है

🌟 मुख्यमंत्री अपनी इच्छा से पद का त्याग भी कर सकता है और मंत्रिपरिषद को समाप्त भी कर सकता है

🌟 मुख्यमंत्री मंत्री परिषद के विभिन्न विभागों का बंटवारा भी करता है

🌟 मुख्यमंत्री राज्यपाल को विधानसभा का सत्र बुलाने और विधानसभा के सत्र को स्थगित करने के लिए भी सलाह प्रदान करता है

 🌟 मुख्यमंत्री राज्य की जनता की समस्याओं को सुनने और उसको सुलझाने के लिए विभिन्न कार्य कर सकते हैं

🌟 मुख्य मंत्री विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति, महाधिवक्ता, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों, राज्य निर्वाचन आयोग आदि को नियुक्त करने के लिए राज्यपाल को परामर्श देता है।

त्यागपत्र: मुख्यमंत्री अपना त्यागपत्र राज्यपाल को देता है

मुख्यमंत्री द्वारा त्यागपत्र राज्यपाल को देने से विधानसभा भंग हो जाते हैं जिसके कारण राज्य में फिर से चुनाव कराने के लिए आवश्यक हो जाते हैं

उपमुख्यमंत्री: उप मुख्यमंत्री का उल्लेख संविधान में नहीं है, लेकिन किसी बहुमत दल में दो या दो से अधिक व्यक्ति जो दल में विशेष प्रभाव रखते हैं उन्हें खुश या संतुष्ट रखने के लिए उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है ताकि सरकार को कार्य करने में कोई समस्या न हो और सरकार विधानसभा में बहुमत भी बना रहे 

Previous
Next Post »

Please do not enter any spam links in comment box... 🙏 ConversionConversion EmoticonEmoticon