Economy | अर्थव्यवस्था
अर्थव्यवस्था : अर्थ से तात्पर्य है धन और व्यवस्था से तात्पर्य है नियम या कानून अर्थात अर्थव्यवस्था शब्द का शाब्दिक अर्थ यह है कि देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना या पूर्ण रूप से संपन्न बनाना
🌟 विश्व की बात करें तो जो देश आर्थिक रूप से अर्थात धन के रूप मे अधिक बलशाली है वह शक्तिशाली प्रतीत होता है और जो आर्थिक रूप से विकसित देशों के मुकाबले इतने सशक्त या आत्मनिर्भर नहीं है वह देश विकसित देशों की तुलना में पिछड़ा हुआ गिना जाता है
" वर्तमान में भारत विकासशील देश है जो विकसित देश बनने की राह पर है "
🌟 भारत जब स्वतंत्र हुआ तो उसकी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत नहीं थी क्योंकि उस समय भारत को आय सिर्फ प्राथमिक क्षेत्र अर्थात कृषि के क्षेत्रों से ही होती थी क्योंकि भारत तकनीकी रूप से अर्थात वैज्ञानिक दृष्टि से इतना शक्तिशाली नहीं था जो अपनी कृषि कार्यों को तकनीकी रूप से संपन्न या मजबूत कर सकें सन 1947 मे जब भारत अंग्रेजों के अत्याचारों से आजाद हुआ अर्थात स्वतंत्र हुआ तब देश को लगभग 90% से भी ज्यादा कि आय सिर्फ कृषि कार्यों से ही होती थी परंतु जैसे-जैसे भारत प्रगति करता गया तो उसने ऐसी तकनीकों का विकास किया जिससे वह अपने देश की आर्थिक स्थिति अर्थात अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत हो सके
भागीदारी : किसी भी देश के विकास मे उस देश की जनता , उद्योगों और मजदूरों आदि का सहयोग रहता है क्योंकि यह वही संस्था या लोग होते हैं जो देश में उत्पादन को बढ़ाते हैं और उसी उत्पादन को अन्य देशों में निर्यात किया जाता है जिससे देश को आय प्राप्त होती है और इसी आय से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है देश का व्यक्ति जो कार्य करता हो जिससे देश को आय प्राप्त होती है और वह खुद भी आय प्राप्त करता है और उस आय का कुछ भाग कर के रूप में देश के खाते में जमा कराता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत होती है अर्थात देश आर्थिक रूप से मजबूत होता है
विकसित देश और भारत : विकसित देशों की बात करें तो वह देश इतने आर्थिक रूप से इतने शक्तिशाली इसलिए है क्योंकि वहां के नागरिक अपनी आय का कुछ भाग सरकार को कर के रूप में प्रदान करते हैं अर्थात वह उस भाग को अपने पास नहीं रखते और विकासशील देश (भारत ) की बात करें तो यहां के लगभग 10 से 12 प्रतिशत ही ऐसे नागरिक होंगे जो अपनी आय का कुछ भाग कर के रूप में सरकारी संस्था को प्रदान करते हैं और इसी कर से देश में विकास के कार्य किए जाते हैं
🌟 जब भारत स्वतंत्र हुआ तब अमेरिकी डॉलर और भारत का रुपया बराबर अर्थात सम्मान थे जैसे $1 = ₹1 परंतु जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ता गया समय के साथ यहां के राजनीति में सक्रिय लोगों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बजाय अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने की धारणा पर बल दिया अर्थात भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा हुआ इसका परिणाम यह निकला कि वर्तमान में डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत लगातार गिरती जा रही है और भारत में अमीरी और गरीबी के बीच में खाई बढ़ती ही गई
वर्तमान में 3 क्षेत्र है जो अर्थव्यवस्था का निर्धारण करते हैं :-
(1) प्राथमिक क्षेत्र : प्राथमिक क्षेत्र अर्थात क्षेत्र में कृषि से संबंधित उत्पादन से आय होती है और यह क्षेत्र भारत में विशाल भूभाग पर फैला हुआ है और इस क्षेत्र में भारत की जनता की भागीदारी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले बहुत ज्यादा है अर्थात इस क्षेत्र में कच्चा माल उत्पादित किया जाता है और उस कच्चे माल को आगे अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है जिससे वस्तु को पूर्ण रूप से निर्मित किया जा सके क्षेत्र के लोगों का कार्य बहुत ही मेहनत से भरा होता है क्योंकि उन्हें दिन और रात में बहुत ज्यादा घंटे कार्य तक कार्य करना पड़ता है और अगर बेमौसम बारिश हो जाए तो इनकी यह मेहनत बेकार चले जाती है इतनी मेहनत से कार्य करने पर भी इस क्षेत्र के लोगों को बहुत कम आय प्राप्त होती है
(2) द्वितीय क्षेत्र : द्वितीय क्षेत्र से तात्पर्य है कि इसमें कृषि से प्राप्त कच्चे माल को उद्योगों के माध्यम से एक वस्तु का रूप दिया जाता है अर्थात वस्तु को उसका स्वरूप प्रदान किया जाता है क्षेत्र में भारत की जनता की भागीदारी प्राथमिक क्षेत्र के मुकाबले हैं कम है क्योंकि क्षेत्र में उद्योग फैक्ट्रियां आदि से कार्य किया जाता है तो यह क्षेत्र लोगों को कम आकर्षित करता है अर्थात लोगों की रुचि इतनी इस क्षेत्र के प्रति नहीं है जितनी कि प्राथमिक क्षेत्र के प्रति है
(3) तृतीय क्षेत्र : तृतीय क्षेत्र इसमें हम संचार सेवाओं को शामिल करेंगे जिससे देश को सबसे ज्यादा आय प्राप्त होती है क्षेत्र में ज्यादातर शिक्षित लोगों की भागीदारी होती है जो अपनी मानसिक शक्ति से उत्पादन की क्रियाओं को क्रियान्वित करते हैं
महत्वपूर्ण बातें : (1) अगर स्वतंत्रता के बाद सरकार द्वारा प्राथमिक क्षेत्रों पर भी इतना ध्यान देती जो वर्तमान में द्वितीय व तृतीय क्षेत्रों पर दे रही है तो आज भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ज्यादा मजबूत होती
(2) सरकारों द्वारा अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए जो कार्य किए गए उस कार्य को क्रियान्वित करने का भ्रष्टाचार मुक्त नीति नहीं थी अर्थात जो भी कार्य सरकार द्वारा प्राथमिक क्षेत्र को उठाने में किए गए उसने भ्रष्टाचार बहुत बड़ी मात्रा में होता था
(3) अगर सरकार द्वारा स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता तो प्राथमिक क्षेत्र के कार्य तकनीकी नीति से किए जाते तो इस क्षेत्र से भारत को बहुत ज्यादा आय प्राप्त होती जितनी स्वतंत्र के बाद कुछ वर्षों तक हुई थी
विकसित देशों की अर्थव्यवस्था : (1) विकसित देशों की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत होने का एकमात्र कारण यह है कि उन देशों में सभी तीन क्षेत्रों से आए समान रूप से आय प्राप्त होती है अर्थात तीनों क्षेत्र तकनीकी रूप से बहुत ज्यादा शक्तिशाली होते हैं जो उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं
(2) विकसित देशों की अर्थव्यवस्था इसलिए मजबूत हैं क्योंकि वहां पर भ्रष्टाचार मुक्त कार्य किया जाता है उदाहरण के लिए अगर सरकार द्वारा किसानों के लिए
सरकार द्वारा जो रखता हूं या मदद राशि दी जाती है वह पूर्ण रूप से प्राप्त होती है अर्थात उसकी हिस्सेदारी नहीं होती है
(3) विकसित देशों मे व्यक्तियों की आय अर्थात प्रति व्यक्ति आय बहुत ज्यादा होती हैं विकासशील देशों की तुलना में
(4) विकसित देश तकनीकी रूप से सशक्त व संपूर्ण है इसलिए उनकी अर्थव्यवस्था भी काफी मजबूत है
🌟 विश्व की बात करें तो जो देश आर्थिक रूप से अर्थात धन के रूप मे अधिक बलशाली है वह शक्तिशाली प्रतीत होता है और जो आर्थिक रूप से विकसित देशों के मुकाबले इतने सशक्त या आत्मनिर्भर नहीं है वह देश विकसित देशों की तुलना में पिछड़ा हुआ गिना जाता है
" वर्तमान में भारत विकासशील देश है जो विकसित देश बनने की राह पर है "
🌟 भारत जब स्वतंत्र हुआ तो उसकी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत नहीं थी क्योंकि उस समय भारत को आय सिर्फ प्राथमिक क्षेत्र अर्थात कृषि के क्षेत्रों से ही होती थी क्योंकि भारत तकनीकी रूप से अर्थात वैज्ञानिक दृष्टि से इतना शक्तिशाली नहीं था जो अपनी कृषि कार्यों को तकनीकी रूप से संपन्न या मजबूत कर सकें सन 1947 मे जब भारत अंग्रेजों के अत्याचारों से आजाद हुआ अर्थात स्वतंत्र हुआ तब देश को लगभग 90% से भी ज्यादा कि आय सिर्फ कृषि कार्यों से ही होती थी परंतु जैसे-जैसे भारत प्रगति करता गया तो उसने ऐसी तकनीकों का विकास किया जिससे वह अपने देश की आर्थिक स्थिति अर्थात अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत हो सके
![]() |
| 1.खेत में कार्य करते किसान |
भागीदारी : किसी भी देश के विकास मे उस देश की जनता , उद्योगों और मजदूरों आदि का सहयोग रहता है क्योंकि यह वही संस्था या लोग होते हैं जो देश में उत्पादन को बढ़ाते हैं और उसी उत्पादन को अन्य देशों में निर्यात किया जाता है जिससे देश को आय प्राप्त होती है और इसी आय से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है देश का व्यक्ति जो कार्य करता हो जिससे देश को आय प्राप्त होती है और वह खुद भी आय प्राप्त करता है और उस आय का कुछ भाग कर के रूप में देश के खाते में जमा कराता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत होती है अर्थात देश आर्थिक रूप से मजबूत होता है
विकसित देश और भारत : विकसित देशों की बात करें तो वह देश इतने आर्थिक रूप से इतने शक्तिशाली इसलिए है क्योंकि वहां के नागरिक अपनी आय का कुछ भाग सरकार को कर के रूप में प्रदान करते हैं अर्थात वह उस भाग को अपने पास नहीं रखते और विकासशील देश (भारत ) की बात करें तो यहां के लगभग 10 से 12 प्रतिशत ही ऐसे नागरिक होंगे जो अपनी आय का कुछ भाग कर के रूप में सरकारी संस्था को प्रदान करते हैं और इसी कर से देश में विकास के कार्य किए जाते हैं
![]() |
| 2.विकसित देश और भारत |
🌟 जब भारत स्वतंत्र हुआ तब अमेरिकी डॉलर और भारत का रुपया बराबर अर्थात सम्मान थे जैसे $1 = ₹1 परंतु जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ता गया समय के साथ यहां के राजनीति में सक्रिय लोगों ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बजाय अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने की धारणा पर बल दिया अर्थात भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा हुआ इसका परिणाम यह निकला कि वर्तमान में डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत लगातार गिरती जा रही है और भारत में अमीरी और गरीबी के बीच में खाई बढ़ती ही गई
वर्तमान में 3 क्षेत्र है जो अर्थव्यवस्था का निर्धारण करते हैं :-
(1) प्राथमिक क्षेत्र : प्राथमिक क्षेत्र अर्थात क्षेत्र में कृषि से संबंधित उत्पादन से आय होती है और यह क्षेत्र भारत में विशाल भूभाग पर फैला हुआ है और इस क्षेत्र में भारत की जनता की भागीदारी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले बहुत ज्यादा है अर्थात इस क्षेत्र में कच्चा माल उत्पादित किया जाता है और उस कच्चे माल को आगे अन्य क्षेत्रों में भेजा जाता है जिससे वस्तु को पूर्ण रूप से निर्मित किया जा सके क्षेत्र के लोगों का कार्य बहुत ही मेहनत से भरा होता है क्योंकि उन्हें दिन और रात में बहुत ज्यादा घंटे कार्य तक कार्य करना पड़ता है और अगर बेमौसम बारिश हो जाए तो इनकी यह मेहनत बेकार चले जाती है इतनी मेहनत से कार्य करने पर भी इस क्षेत्र के लोगों को बहुत कम आय प्राप्त होती है
(2) द्वितीय क्षेत्र : द्वितीय क्षेत्र से तात्पर्य है कि इसमें कृषि से प्राप्त कच्चे माल को उद्योगों के माध्यम से एक वस्तु का रूप दिया जाता है अर्थात वस्तु को उसका स्वरूप प्रदान किया जाता है क्षेत्र में भारत की जनता की भागीदारी प्राथमिक क्षेत्र के मुकाबले हैं कम है क्योंकि क्षेत्र में उद्योग फैक्ट्रियां आदि से कार्य किया जाता है तो यह क्षेत्र लोगों को कम आकर्षित करता है अर्थात लोगों की रुचि इतनी इस क्षेत्र के प्रति नहीं है जितनी कि प्राथमिक क्षेत्र के प्रति है
(3) तृतीय क्षेत्र : तृतीय क्षेत्र इसमें हम संचार सेवाओं को शामिल करेंगे जिससे देश को सबसे ज्यादा आय प्राप्त होती है क्षेत्र में ज्यादातर शिक्षित लोगों की भागीदारी होती है जो अपनी मानसिक शक्ति से उत्पादन की क्रियाओं को क्रियान्वित करते हैं
महत्वपूर्ण बातें : (1) अगर स्वतंत्रता के बाद सरकार द्वारा प्राथमिक क्षेत्रों पर भी इतना ध्यान देती जो वर्तमान में द्वितीय व तृतीय क्षेत्रों पर दे रही है तो आज भारत की अर्थव्यवस्था बहुत ज्यादा मजबूत होती
(2) सरकारों द्वारा अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए जो कार्य किए गए उस कार्य को क्रियान्वित करने का भ्रष्टाचार मुक्त नीति नहीं थी अर्थात जो भी कार्य सरकार द्वारा प्राथमिक क्षेत्र को उठाने में किए गए उसने भ्रष्टाचार बहुत बड़ी मात्रा में होता था
(3) अगर सरकार द्वारा स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ज्यादा ध्यान दिया जाता तो प्राथमिक क्षेत्र के कार्य तकनीकी नीति से किए जाते तो इस क्षेत्र से भारत को बहुत ज्यादा आय प्राप्त होती जितनी स्वतंत्र के बाद कुछ वर्षों तक हुई थी
विकसित देशों की अर्थव्यवस्था : (1) विकसित देशों की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत होने का एकमात्र कारण यह है कि उन देशों में सभी तीन क्षेत्रों से आए समान रूप से आय प्राप्त होती है अर्थात तीनों क्षेत्र तकनीकी रूप से बहुत ज्यादा शक्तिशाली होते हैं जो उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं
(2) विकसित देशों की अर्थव्यवस्था इसलिए मजबूत हैं क्योंकि वहां पर भ्रष्टाचार मुक्त कार्य किया जाता है उदाहरण के लिए अगर सरकार द्वारा किसानों के लिए
सरकार द्वारा जो रखता हूं या मदद राशि दी जाती है वह पूर्ण रूप से प्राप्त होती है अर्थात उसकी हिस्सेदारी नहीं होती है
(3) विकसित देशों मे व्यक्तियों की आय अर्थात प्रति व्यक्ति आय बहुत ज्यादा होती हैं विकासशील देशों की तुलना में
(4) विकसित देश तकनीकी रूप से सशक्त व संपूर्ण है इसलिए उनकी अर्थव्यवस्था भी काफी मजबूत है


Please do not enter any spam links in comment box... 🙏 ConversionConversion EmoticonEmoticon