शिवनाथसिंह आसोप: अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा

 शिवनाथसिंह आसोप: अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा

ठाकुर शिवनाथसिंह आसोप – मारवाड़ के स्वतंत्रता सेनानी, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध करते हुए
ठाकुर शिवनाथसिंह आसोप और उनकी वीर माता माजी फूल कंवर – मारवाड़ के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा

राजस्थान के इतिहास में कई ऐसे राजपूत योद्धा हुए हैं, जिन्होंने अंग्रेजी सत्ता के सामने झुकने से इनकार किया। ठाकुर शिवनाथसिंहजी कूंपावत, आसोप ठिकाने के जागीरदार, उनमें प्रमुख थे। जब अधिकांश राजपूत रियासतें अंग्रेजों से संधि कर चुकी थीं, ठाकुर शिवनाथसिंहजी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध और विरोध किया।

1.राजस्थान-ईस्ट इंडिया कंपनी संधियाँ  

अंग्रेजो का दौर शुरू होता हैं वि.सं. 1875 (लगभग 1818 ई.) मराठों और पिंडारियों की लूट संदर्भ ( ग्रंथ: शेखावाटी प्रदेश का राजनीतिक इतिहास, पृष्ठ 683 ) तथा इन संधियों के बावजूद कई जागीरदार अंग्रेज विरोधी बने रहे, जिनमें आसोप के ठाकुर शिवनाथसिंहजी प्रमुख थे।

2. मारवाड़ में अंग्रेज विरोधी ठिकानेदार

• प्रमुख ठिकाने: आउवा, गूलर, आसोप, आलनियावास

• जोधपुर महाराजा तख्तसिंहजी ने विरोध रोकने के लिए समझाया न मानने वालों की जागीरें जब्त की गईं परन्तु फिर भी स्वतंत्रता की चेताना जागीरदारों ने विरोध जारी रखा|

3. ठाकुर शिवनाथसिंह आसोप का प्रारंभिक जीवन (Childhood)

ठाकुर शिवनाथसिंह आसोप का बचपन सामान्य बालकों जैसा नहीं था। उनका बचपन संघर्ष, राजनीति और राजपूती आन-बान के माहौल में बीता। उनके जीवन के इस प्रारंभिक चरण ने उन्हें भविष्य के स्वतंत्रता संग्राम योद्धा के रूप में तैयार किया।

3.1 जन्म और मूल परिवार

• जन्म स्थल: हिंगोली ठिकाना (आसोप नहीं)

• पिता: ठाकुर मुहब्बतसिंहजी (हिंगोली)

• वंश: मारवाड़ के राठौड़ वंश की ‘कूंपावत’ शाखा

3.2 आसोप में गोद आना (दत्तक पुत्र)

उस समय आसोप के तत्कालीन ठाकुर बख्तावरसिंहजी निसंतान थे। ठकुरानी माजी फूल कंवर खंगारोतजी ने निर्णय लिया कि हिंगोली के ठाकुर मुहब्बतसिंहजी के पुत्र शिवनाथसिंह को गोद लिया जिनकी उम्र 5–6 वर्ष थी इसके बाद महाराजा मानसिंहजी (जोधपुर) ने गोदनामे को स्वीकार किया और शिवनाथसिंहजी को आसोप का उत्तराधिकारी घोषित किया।

3.3 बचपन में युद्ध और संकट का सामना

बाल शिवनाथसिंह को आसोप की गद्दी पर बैठते ही विरोधी और स्वार्थी तत्व किले पर कब्जा करने की योजना बनाने लगे किले की घेराबंदी हुई, छोटे शिवनाथसिंहजी के सामने हमला होता हैं माजी फूल कंवर की वीरता और सूझ बुझ से किले के दरवाजे बंद कराए और फिर आक्रमण की रणनीति बनाकर वफादार सैनिकों के साथ रक्षा की, कूटनीति और साहस से दुश्मनों को लौटने पर मजबूर किया|

 यह घटना बालक शिवनाथसिंह पर गहरा प्रभाव डाल गई। उन्होंने बचपन में ही यह समझ लिया कि अपनी जमीन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए कभी हथियार उठाना आवश्यक है।

3.4 शिक्षा और संस्कार

• शस्त्र विद्या: तलवारबाजी, घुड़सवारी और भाला चलाने में निपुण

• शास्त्र और नीति: राजकाज चलाना, न्याय करना, सामंती शिष्टाचार

• स्वतंत्रता के बीज: कूंपावत राठौड़ परिवार की वीरता और हठ ने शिवनाथसिंहजी के स्वभाव में किसी के आगे न झुकने का संस्कार भरा

3.5 युवावस्था में प्रवेश

• व्यक्तित्व: गंभीर और स्वाभिमानी

•अंग्रेजों के धीरे-धीरे प्रभाव को देख, बचपन में लड़े गए संघर्ष ने उन्हें 1857 के महासंग्राम के लिए तैयार किया

4. 1857 स्वतंत्रता संग्राम और आउवा विद्रोह

• 1857 ई.: स्वतंत्रता संग्राम प्रारंभ

• डीसा और एरिनपुरा छावनियों के सैनिक विद्रोह कर मारवाड़ आए

• आउवा के ठाकुर कुशालसिंहजी ने सैनिकों को शरण दी

• ठाकुर बिशनसिंह (गूलर) और ठाकुर अजीतसिंह (आलनियावास) ने सेना सहित सहयोग किया

5. आउवा और आसोप का युद्ध

• अंग्रेज और जोधपुर सेना ने आउवा को घेरा

• कैप्टन मेशन अपनी सेना सहित पहुँचे

पलटवार की रणनीति के साथ वर्ष 1857 ई. स्थान आउवा में शिवनाथसिंहजी ने अपनी सैन्य टुकड़ी भेजकर अचानक हमला किया जिसका परिणाम ये हुआ कि जोधपुर सेना के प्रमुख ओनाड़सिंह व राजमल लोढ़ा मारे गए और सेनापति कुशलराज सिंघवी और विजयमल मेहता भाग खड़े हुए साथ ही अंग्रेज अधिकारी कैप्टन मेशन मारा गया|

6. जागीर जब्ती और बड़लू युद्ध

• आउवा और अन्य ठिकानों की जागीरें जब्त → 1857–1858 ई.

• आसोप की जागीर भी जब्त → 1858 ई.

• शिवनाथसिंहजी बड़लू (वर्तमान भोपालगढ़) गए

• वहाँ भी युद्ध हुआ → कई योद्धा शहीद 1858 ई.

7. जोधपुर में कैद और मेवाड़ पलायन

• शिवनाथसिंहजी को जोधपुर लाकर नजरबंद → 1858 ई. 

• अवसर पाकर जोधपुर किले से भागकर मेवाड़ चले गए

8. फौजी अदालत और न्याय

• फौजी अदालत गठित → 1859 ई.

• निर्णय: विद्रोही ठिकानेदार बरी, जागीरें वापस → 1859–1860 ई.

9. विवाह और पारिवारिक जीवन

• पत्नी: चाँद कुंवर (जालामंड, ठाकुर गंभीरसिंह राणावत की पुत्री)

• अन्य विवाह: बिजोलिया व कनावात वंश

• कुल विवाह: तीन

10. स्वर्गवास और स्मृति

• स्वर्गवास: वि.सं. 1929, पौष शुक्ला 12 (~1872 ई.)

• स्मारक छतरी निर्माण: माजी फूल कंवर राणावतजी → 1873–1875 ई.

11. आधुनिक भारत में सम्मान

• मोदी सरकार मंत्रिमंडल का आसोप आगमन → 2014 के बाद

• ठाकुर शिवनाथसिंहजी का चित्र वंशजों को भेंट

🙏 निष्कर्ष

• ठाकुर शिवनाथसिंह आसोप:

• अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ युद्ध करने वाले वीर

• स्वतंत्रता चेतना और शौर्य का प्रतीक

• राजस्थान के इतिहास में अमर योगदान


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