रणसी गांव की भूत बावड़ी | Bhoot Bawdi of Ransi Village

रणसी गांव की भूत बावड़ी|Bhoot Bawdi of Ransi Village

राजस्थान का ऐसा गांव जो अपनी भूत बावड़ी के लिए इतिहास में प्रसिद्ध है और इसके साक्ष्य आज भी धरातल पर मौजूद है हम संक्षिप्त रूप से रणसी गांव की भूत बावड़ी के बारे में जानेंगे


जब हम राजस्थान के इतिहास को विस्तार से पढ़ते हैं तो हमें स्थापत्य कला के बहुत सारे उदाहरण देखने को मिलते हैं इन स्थापत्य कला में दुर्ग , महल , किले , बावड़ी , भवन , मूर्तियां आदि कि बहुत ही सुंदर और उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिलते हैं जब रियासत काल में राजा महाराजा अपनी प्रजा की जल संबंधी समस्या को हल करने के लिए विभिन्न तरह के कुए , बावड़िया , सरोवर तथा तालाबों का निर्माण करवाते थे ताकि रियासत में कोई भी प्यासा न रह सके परंतु आज हम एक ऐसी बावड़ी के बारे में जानेंगे जिसको इतिहास में रणसी गांव की भूत बावड़ी के नाम से जाना जाता है और जिसका निर्माण एक भूत द्वारा किया गया था


राजस्थान राज्य के जोधपुर जिले से लगभग 90 किलोमीटर दूर तथा पाली जिले से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर में एक गांव स्थित है जिसको रणसी गांव कहां जाता है और यह गांव इतिहास में तथा वर्तमान में बावड़ी के लिए प्रसिद्ध है इस बावड़ी का निर्माण मानव द्वारा ना होकर एक भूत द्वारा निर्माण करवाया  जाता है

प्रारंभिक इतिहास :-

जोधपुर की स्थापना राव जोधा द्वारा की गई थी राव जोधा ने किले का निर्माण करवाया और जितना भी क्षेत्र उनके अधिकार में आता था उनको अपने भाइयों में बांट दिया और इसी प्रकार चांपा जी को बनाड़ तथा कपरड़ा गांव की जागीर मिली थी चांपा जी के वंशज चंपावत  कहलाए चांपा जी तथा उनके वंशज कुछ वर्षों तक कपरड़ा गांव में रुके और जब एक ऋषि द्वारा श्राप दिया गया तो चांपा जी के वंशजों ने इस गांव को छोड़कर चले गए  तथा दूसरे ऋषि के कहने पर दूसरा गांव बसाया जिसको रणसी गांव कहते हैं चांपा जी के वंशज ठाकुर जयसिंह जिनको इतिहास में जैसा जी के नाम से भी जाना जाता है ठाकुर जय सिंह अपने अश्व पर सवार होकर एक नए स्थान पर पहुंचते हैं और उसी स्थान पर अपने लिए महल का निर्माण कराते हैं इसी स्थान को रणसी गांव के रूप में पहचान मिली थी

ठाकुर जय सिंह और भूत बावड़ी का किस्सा :-

ठाकुर जय सिंह रणसी गांव के ठाकुर थे और उस समय रणसी गांव की जागीर जोधपुर रियासत के अंतर्गतआती थी इसलिए ठाकुर जय सिंह समय-समय पर जोधपुर सियासत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे एक दिन जब ठाकुर जय सिंह रणसी गांव से जोधपुर के लिए निकले तो बीच रास्ते में ही रात हो गई और वह एक तालाब के पास रुके जैसे ही तालाब के पास गए उन्होंने अपने अश्व को पानी पिलाने लगे अश्व पानी पी ही रहा था कि जंगल से झाड़ियों के बीच से आवाज आई ठाकुर जय सिंह देवी के उपासक थे और एक राजपूत होने के नाते वे विचलित नहीं हुए और तुरंत उस झाड़ियों की तरफ चल पड़े जब ठाकुर जय सिंह झाड़ियों के पास पहुंचे तो देखा कि एक भूत (आत्मा) आवाज देता है कि मुझे पानी पिला दो बहुत प्यास लगी है मैं किसी श्राप के कारण पानी अपने आप नहीं पी सकता इसके बाद ठाकुर जय सिंह पानी लेकर आते हैं और उस आत्मा को पानी पिलाते हैं पानी पिलाने के बाद आत्मा को ठाकुर जय सिंह कुछ खाने के लिए भोजन देते हैं और इसके बाद वे वहां से चलने लगते हैं परंतु जैसे ही वे अपने अश्व पर चढ़ते हैं उससे पहले ही उस आत्मा ने उनसे कहा कि मुझे आपसे कुश्ती करनी है ठाकुर जय सिंह कद काठी में बड़े मजबूत और शक्तिशाली व्यक्ति थे इसलिए उन्होंने आत्मा के यह है प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया और जब दोनों के बीच मल युद्ध चल रहा था कुछ ही समय हुआ था कि तभी ठाकुर जय सिंह ने उस आत्मा को अपनी शक्तिशाली बाहों में दबाकर जमीन पर दे मारा और इसके बाद उस आत्मा ने उनसे माफी मांगने लगा और बोला कि मुझे माफ कर दो मैं आपसे युद्ध नहीं करना चाहता तभी ठाकुर जय सिंह कहते हैं कि तुम्हें अगर माफी चाहिए तो एक काम करना पड़ेगा और वह कहते हैं कि तेरे को रणसी गांव के महल के आगे एक बावड़ी का निर्माण करना होगा इतना सुनते ही उस आत्मा ने उन्हें हां कह दिया उस आत्मा ने कहा कि यहां पर दिन में कारीगरों तथा मजदूरों से कार्य करवाइए और वे मजदूर जितना काम दिन में करेंगे उनसे दुगना कार्य मैं रात में कर दूंगा परंतु एक शर्त  आत्मा रखती है कि आप इस घटना का जिक्र  किसी भी मानव  या अपने सगे संबंधियों के साथ नहीं करेंगे  अगर आपने इस वचन को तोड़ दिया तो  इस बावड़ी का निर्माण कार्य  कभी भी पूरा नहीं होगा और इसके बाद यह सिलसिला चला दिन में मजदूर कार्य करते उससे दुगुना कार्य रात में पूरा हो जाता था जब अगले दिन मजदूर आते तो वे देखकर हैरान रह जाते और गांव के लोग भी हैरान रह जाते कि इतना कार्य तो कल हुआ ही नहीं था परंतु यह एकदम से कैसे हो गया निर्माण का कार्य कई दिनों से चल रहा था और बावड़ी भी  अपने पूर्ण अस्तित्व में आने ही वाली थी कि तभी एक दिन ठाकुर जय सिंह की रानी ज़िद पर बैठ गए और उनसे पूछा कि बावड़ी का कार्य दिन में कम होता है लेकिन रात के बाद जब अगली सुबह होती है तो वह काम दुगुना कैसे हो जाता है जब ठाकुर जय सिंह की पत्नी ने खाना पानी भी छोड़ दिया तब ठाकुर जय सिंह ने अपने वचन को तोड़ते हुए सारी की सारी बात अपनी पत्नी को बता दी और वचन तोड़ते हैं जितना कार्य हुआ था उतना ही रहा और इसके बाद बावड़ी का कार्य वर्तमान तक पूरा नहीं हो सका


इतिहास में यह रणसी गांव की भूत बावड़ी के नाम से प्रसिद्ध है यहां पर भारत तथा विदेश से सैलानी भ्रमण करने के लिए आते हैं रणसी गांव में भूत बावड़ी तथा महल देखने लायक ऐतिहासिक धरोहर है तथा वर्तमान में रणसी गांव में खनिज पदार्थ भी मौजूद है जिसका उत्खनन करके सरकार के राजस्व में वृद्धि हो रही है
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