संविधान : संविधान लैटिन भाषा के शब्द कॉन्स्टिट्यूशन से बना है जिसका अर्थ है कानून या विधि
क्यों जरूरत पड़ी सविधान की : किसी भी देश के निर्माण , विकास , एकता व अखंडता और प्रगतिशील पथ पर आगे बढ़ने के लिए कुछ कानून और विधियां बनाना आवश्यक होता है इस प्रकार की प्रणाली में सभी व्यक्तियों को भी अपनी स्वतंत्रता के अधिकार प्रदान करना आवश्यक होता है और ऐसी व्यवस्था जो देश करता है वह प्रगति के पथ पर आगे तक बढ़ता है प्रथम पंक्ति में हमने समझा है कि संविधान का अर्थ कानून या विधि होता है अर्थात सविधान की इसलिए जरूरत पड़ी क्योंकि सविधान के द्वारा हम किसी भी व्यक्ति को उसको अपने अधिकार से वंचित होने पर या जो संस्था , राज्य या व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने अधिकारों से वंचित करते हैं तो उसको न्याय दिलाना विधि का प्रथम कर्तव्य होगा और ऐसी व्यवस्था जिस देश में होती हैं उस देश को लोकतांत्रिक देश कहते हैं आजादी से पूर्व भारत में ऐसी व्यवस्था नहीं थी यहां के नागरिकों को उनके अधिकार प्राप्त नहीं थे देश का शासन अंग्रेजों द्वारा चलाया जाता था और अंग्रेजोंं के कारण देश आर्थिक , राजनैतिक , सामाजिक और भौगोलिक रूप से पिछड़ता और बटता ही जा रहा था इन सभी समस्याओं का हल निकालने के लिए सविधान का निर्माण करना देश के लिए आवश्यक हो गया था इसलिए यहां के नागरिकों ने देश का संविधान निर्माण करने का जिम्मा अपने कंधों पर उठाया
संविधान निर्माण के लिए उठाए गए कदम : (1) भारत का संविधान निर्माण करने के लिए सर्वप्रथम 1857 राष्ट्रीय आंदोलन के समय लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि हम अंग्रेजों के अधीन नहीं रहेंगे और अपना देश अपने लोगों के अधिकार से चलाएंगे
(2) 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज विधेयक में यह प्रथम बात रखी की भारत के लिए एक संविधान सभा होनी चाहिए
(3) मोहनदास करमचंद गांधी ने 1922 में यह विचार दिया कि भारत के संविधान का निर्माण भारत के लोग अपनी इच्छा से करेंगे
(4) 1924 में मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार के सामने सविधान सभा बनाने की बात कही
(5) 1928 की नेहरू रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट रूप से कह दी गई कि भारत का संविधान निर्माण भारत के लोगों के द्वारा ही किया जाएगा इसमें किसी बाहरी का हस्तक्षेप नहीं होगा
(6) भारतीय संविधान निर्माण की मांग पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1938 के कांग्रेस अधिवेशन में ब्रिटिश सरकार के सम्मुख रखी और इस बात को 8 अगस्त 1940 के अगस्त प्रस्ताव में ब्रिटिश सरकार के लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा स्वीकार कर लिया गया
" 30 मार्च 1942 को क्रिप्स मिशन ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया गया कि भारत का संविधान भारत के लोगों के द्वारा ही लिखा जाएगा परंतु यह बात मुस्लिम लीग को पसंद नहीं आई और वह अपनी एक ही बात पर अड़ी रही की देश को दो बराबर भागों में विभाजित किया जाए और दोनों का अपना अपना सविधान हो "
🌟 राष्ट्रव्यापी आंदोलन और ब्रिटिश सरकार का घोर विरोध हो रहा था तो ब्रिटिश सरकार को यह समझ आ गया था कि हम ज्यादा समय तक भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े नहीं रख सकते इसलिए ब्रिटिश सरकार ने 24 मार्च 1946 को एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा
कैबिनेट मिशन : कैबिनेट मिशन 24 मार्च 1946 को भारत आया और इस मिशन में 3 सदस्य थे
1) लॉर्ड पैट्रिक लॉरेंस
2) ए वी एलेग्जेंडर
3) सर स्टीवर्ड क्रिप्स
🌟 कैबिनेट मिशन ने अगस्त प्रस्ताव पर गंभीर विचार किया और 2 महीनों के बाद इस मिशन ने भारत के संविधान निर्माण के लिए निम्न बातों रखी
कैबिनेट मिशन की बातें :-
(1) संविधान निर्माण के लिए एक संविधान सभा का चुनाव किया जाएगा जिसमें कुल 389 सदस्य होंगे इन 389 सदस्यों में से 292 सदस्यों का चुनाव ब्रिटिश आधिपत्य क्षेत्र से किया जाएगा , 93 सदस्यों को मनोनीत देसी रियासतों के राजा महाराजा या राज प्रमुखों द्वारा किया जाएगा और 4 सदस्य केंद्र शासित क्षेत्र से प्रतिनिधि होंगे
( केंद्र शासित प्रदेश - अजमेर मेरवाड़ा , दिल्ली , बलूचिस्तान और कुर्ग )
(2) कैबिनेट मिशन ने दो देश दो संविधान की मुस्लिम लीग की बात को अस्वीकार कर दिया
(3) इन 389 प्रतिनिधियों वाली सरकार को अंतरिम सरकार का नाम दिया गया
अंतरिम सरकार के लिए चुनाव परिणाम : (1) अंतरिम सरकार के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने आई और उसके 298 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए
(2) इस चुनाव में मुस्लिम लिखो 73 सीटें मिले
Note: परंतु देसी रियासतों ने अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत नहीं किया जिससे इस अंतरिम सरकार में देसी रियासतों के प्रतिनिधि शामिल नहीं हो पाए
Note1: यह अंतिम सरकार तब तक कार्य करेगी जब तक संविधान का निर्माण नहीं हो जाता
" अंतरिम सरकार के अध्यक्ष लॉर्ड वेवल और उपाध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू को बनाया गया "
सविधान सभा कि बैठकें : सदस्यों के निर्वाचन के बाद अंतरिम सरकार का गठन किया गया और अंतरिम सरकार को ही संविधान सभा का नाम दिया गया संविधान सभा ने सरकार गठन के बाद तीन महत्वपूर्ण बैठकें करी
प्रथम बैठक : संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित करी गई इस बैठक में डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थाई अध्यक्ष बनाया गया
द्वितीय बैठक : संविधान सभा की द्वितीय बैठक का आयोजन 11 दिसंबर 1946 को हुआ इस बैठक में मैंने बी एन राव को संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया
तृतीय बैठक : संविधान सभा की द्वितीय बैठक का आयोजन 13 दिसंबर 1946 को किया गया और इस आयोजन में उद्देश्य प्रस्ताव को पारित किया गया और यही उद्देश्य प्रस्ताव आगे जाकर प्रस्तावना का रूप बना
🌟 सविधान सभा में कार्यों को करने के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन किया और इन कमेटियों को विभिन्न व्यक्तियों की अध्यक्षता में स्वीकार किया गया
इन कमेटियों में कुछ महत्वपूर्ण कमेटियां निम्नलिखित है :-
(1) संघ संविधान समिति इसके अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू को बनाया गया
(2) प्रांतीय समिति इसके अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल को बनाया गया
सरदार पटेल ने विभिन्न देसी रियासतों का एकीकरण कर उनको अखंडता की माला में पिरोया
(3) न्यायलय समिति इसके अध्यक्ष एस वर्धाचारियार
(4) प्रारूप समिति के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे यह सबसे महत्वपूर्ण समिति थी जिसमें 7 सदस्य थे
महत्वपूर्ण बातें :-
(1) सविधान सभा के लिए मोहनदास करमचंद गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना को नहीं चुना गया था
(2) भारत के बंटवारे के बाद बंगाल का पूर्वी भाग पूर्वी पाकिस्तान बन गया और भीमराव अंबेडकर को दोबारा संविधान सभा का सदस्य चुनने के लिए मुंबई प्रेसिडेंसी की पुणे सीट खाली करवाई और भीमराव अंबेडकर को दुबारा संविधान सभा का सदस्य चुनना गया
संविधान सभा के कार्य :-
(1) भारत के विशाल क्षेत्र में बोली जाने वाली हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया
(2) संविधान सभा ने देश के लिए एक दवा को अपनाया जिसे राष्ट्रीय ध्वज आस्था तिरंगा कहते हैं
(3) 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने राष्ट्रगान , राष्ट्रगीत को अपनाया और भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद बने
🌟 डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान को संविधान सभा के सम्मुख प्रस्तुत किया और इसे पहली बार 4 नवंबर 1948 को संविधान सभा के सम्मुख पढ़ा गया और इसे पारित कर लिया गया जिस पर संविधान सभा के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए
🌟 26 नवंबर 1949 को 299 सदस्यों में से 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए और इससे स्वीकार कर लिया अर्थात सविधान को भारत की जनता ने अंगीकृत कर लिया
🌟 26 जनवरी 1950 को संविधान को पूरे भारत में लागू कर दिया गया इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है
🌟 संविधान का निर्माण करने में 2 वर्ष 11 माह वह 18 दिन का समय लगा और 6400000 रुपए का खर्चा आया
🌟 मूल संविधान में 22भाग , 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी
🌟 वर्तमान संविधान में 22 भाग , 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं
क्यों जरूरत पड़ी सविधान की : किसी भी देश के निर्माण , विकास , एकता व अखंडता और प्रगतिशील पथ पर आगे बढ़ने के लिए कुछ कानून और विधियां बनाना आवश्यक होता है इस प्रकार की प्रणाली में सभी व्यक्तियों को भी अपनी स्वतंत्रता के अधिकार प्रदान करना आवश्यक होता है और ऐसी व्यवस्था जो देश करता है वह प्रगति के पथ पर आगे तक बढ़ता है प्रथम पंक्ति में हमने समझा है कि संविधान का अर्थ कानून या विधि होता है अर्थात सविधान की इसलिए जरूरत पड़ी क्योंकि सविधान के द्वारा हम किसी भी व्यक्ति को उसको अपने अधिकार से वंचित होने पर या जो संस्था , राज्य या व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने अधिकारों से वंचित करते हैं तो उसको न्याय दिलाना विधि का प्रथम कर्तव्य होगा और ऐसी व्यवस्था जिस देश में होती हैं उस देश को लोकतांत्रिक देश कहते हैं आजादी से पूर्व भारत में ऐसी व्यवस्था नहीं थी यहां के नागरिकों को उनके अधिकार प्राप्त नहीं थे देश का शासन अंग्रेजों द्वारा चलाया जाता था और अंग्रेजोंं के कारण देश आर्थिक , राजनैतिक , सामाजिक और भौगोलिक रूप से पिछड़ता और बटता ही जा रहा था इन सभी समस्याओं का हल निकालने के लिए सविधान का निर्माण करना देश के लिए आवश्यक हो गया था इसलिए यहां के नागरिकों ने देश का संविधान निर्माण करने का जिम्मा अपने कंधों पर उठाया
संविधान निर्माण के लिए उठाए गए कदम : (1) भारत का संविधान निर्माण करने के लिए सर्वप्रथम 1857 राष्ट्रीय आंदोलन के समय लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि हम अंग्रेजों के अधीन नहीं रहेंगे और अपना देश अपने लोगों के अधिकार से चलाएंगे
(2) 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज विधेयक में यह प्रथम बात रखी की भारत के लिए एक संविधान सभा होनी चाहिए
(3) मोहनदास करमचंद गांधी ने 1922 में यह विचार दिया कि भारत के संविधान का निर्माण भारत के लोग अपनी इच्छा से करेंगे
(4) 1924 में मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार के सामने सविधान सभा बनाने की बात कही
(5) 1928 की नेहरू रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट रूप से कह दी गई कि भारत का संविधान निर्माण भारत के लोगों के द्वारा ही किया जाएगा इसमें किसी बाहरी का हस्तक्षेप नहीं होगा
(6) भारतीय संविधान निर्माण की मांग पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1938 के कांग्रेस अधिवेशन में ब्रिटिश सरकार के सम्मुख रखी और इस बात को 8 अगस्त 1940 के अगस्त प्रस्ताव में ब्रिटिश सरकार के लॉर्ड लिनलिथगो द्वारा स्वीकार कर लिया गया
" 30 मार्च 1942 को क्रिप्स मिशन ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया गया कि भारत का संविधान भारत के लोगों के द्वारा ही लिखा जाएगा परंतु यह बात मुस्लिम लीग को पसंद नहीं आई और वह अपनी एक ही बात पर अड़ी रही की देश को दो बराबर भागों में विभाजित किया जाए और दोनों का अपना अपना सविधान हो "
🌟 राष्ट्रव्यापी आंदोलन और ब्रिटिश सरकार का घोर विरोध हो रहा था तो ब्रिटिश सरकार को यह समझ आ गया था कि हम ज्यादा समय तक भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े नहीं रख सकते इसलिए ब्रिटिश सरकार ने 24 मार्च 1946 को एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा
कैबिनेट मिशन : कैबिनेट मिशन 24 मार्च 1946 को भारत आया और इस मिशन में 3 सदस्य थे
1) लॉर्ड पैट्रिक लॉरेंस
2) ए वी एलेग्जेंडर
3) सर स्टीवर्ड क्रिप्स
🌟 कैबिनेट मिशन ने अगस्त प्रस्ताव पर गंभीर विचार किया और 2 महीनों के बाद इस मिशन ने भारत के संविधान निर्माण के लिए निम्न बातों रखी
कैबिनेट मिशन की बातें :-
(1) संविधान निर्माण के लिए एक संविधान सभा का चुनाव किया जाएगा जिसमें कुल 389 सदस्य होंगे इन 389 सदस्यों में से 292 सदस्यों का चुनाव ब्रिटिश आधिपत्य क्षेत्र से किया जाएगा , 93 सदस्यों को मनोनीत देसी रियासतों के राजा महाराजा या राज प्रमुखों द्वारा किया जाएगा और 4 सदस्य केंद्र शासित क्षेत्र से प्रतिनिधि होंगे
( केंद्र शासित प्रदेश - अजमेर मेरवाड़ा , दिल्ली , बलूचिस्तान और कुर्ग )
(2) कैबिनेट मिशन ने दो देश दो संविधान की मुस्लिम लीग की बात को अस्वीकार कर दिया
(3) इन 389 प्रतिनिधियों वाली सरकार को अंतरिम सरकार का नाम दिया गया
अंतरिम सरकार के लिए चुनाव परिणाम : (1) अंतरिम सरकार के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने आई और उसके 298 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए
(2) इस चुनाव में मुस्लिम लिखो 73 सीटें मिले
Note: परंतु देसी रियासतों ने अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत नहीं किया जिससे इस अंतरिम सरकार में देसी रियासतों के प्रतिनिधि शामिल नहीं हो पाए
Note1: यह अंतिम सरकार तब तक कार्य करेगी जब तक संविधान का निर्माण नहीं हो जाता
" अंतरिम सरकार के अध्यक्ष लॉर्ड वेवल और उपाध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू को बनाया गया "
सविधान सभा कि बैठकें : सदस्यों के निर्वाचन के बाद अंतरिम सरकार का गठन किया गया और अंतरिम सरकार को ही संविधान सभा का नाम दिया गया संविधान सभा ने सरकार गठन के बाद तीन महत्वपूर्ण बैठकें करी
प्रथम बैठक : संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित करी गई इस बैठक में डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थाई अध्यक्ष बनाया गया
द्वितीय बैठक : संविधान सभा की द्वितीय बैठक का आयोजन 11 दिसंबर 1946 को हुआ इस बैठक में मैंने बी एन राव को संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया
तृतीय बैठक : संविधान सभा की द्वितीय बैठक का आयोजन 13 दिसंबर 1946 को किया गया और इस आयोजन में उद्देश्य प्रस्ताव को पारित किया गया और यही उद्देश्य प्रस्ताव आगे जाकर प्रस्तावना का रूप बना
🌟 सविधान सभा में कार्यों को करने के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन किया और इन कमेटियों को विभिन्न व्यक्तियों की अध्यक्षता में स्वीकार किया गया
इन कमेटियों में कुछ महत्वपूर्ण कमेटियां निम्नलिखित है :-
(1) संघ संविधान समिति इसके अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू को बनाया गया
(2) प्रांतीय समिति इसके अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल को बनाया गया
सरदार पटेल ने विभिन्न देसी रियासतों का एकीकरण कर उनको अखंडता की माला में पिरोया
(3) न्यायलय समिति इसके अध्यक्ष एस वर्धाचारियार
(4) प्रारूप समिति के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे यह सबसे महत्वपूर्ण समिति थी जिसमें 7 सदस्य थे
महत्वपूर्ण बातें :-
(1) सविधान सभा के लिए मोहनदास करमचंद गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना को नहीं चुना गया था
(2) भारत के बंटवारे के बाद बंगाल का पूर्वी भाग पूर्वी पाकिस्तान बन गया और भीमराव अंबेडकर को दोबारा संविधान सभा का सदस्य चुनने के लिए मुंबई प्रेसिडेंसी की पुणे सीट खाली करवाई और भीमराव अंबेडकर को दुबारा संविधान सभा का सदस्य चुनना गया
संविधान सभा के कार्य :-
(1) भारत के विशाल क्षेत्र में बोली जाने वाली हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया
(2) संविधान सभा ने देश के लिए एक दवा को अपनाया जिसे राष्ट्रीय ध्वज आस्था तिरंगा कहते हैं
(3) 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने राष्ट्रगान , राष्ट्रगीत को अपनाया और भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद बने
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| पंडित जवाहरलाल नेहरू संविधान पर हस्ताक्षर करते हुए |
🌟 डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान को संविधान सभा के सम्मुख प्रस्तुत किया और इसे पहली बार 4 नवंबर 1948 को संविधान सभा के सम्मुख पढ़ा गया और इसे पारित कर लिया गया जिस पर संविधान सभा के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए
🌟 26 नवंबर 1949 को 299 सदस्यों में से 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए और इससे स्वीकार कर लिया अर्थात सविधान को भारत की जनता ने अंगीकृत कर लिया
🌟 26 जनवरी 1950 को संविधान को पूरे भारत में लागू कर दिया गया इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है
🌟 संविधान का निर्माण करने में 2 वर्ष 11 माह वह 18 दिन का समय लगा और 6400000 रुपए का खर्चा आया
🌟 मूल संविधान में 22भाग , 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी
🌟 वर्तमान संविधान में 22 भाग , 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं

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